She is seeing her beloved for the last time. It is the last day, probably the last hour. She has within her a raging tempest consuming her soul. Will she be able to speak her heart or will it lay buried in her repressed soul? Read the following poem to know about her anguish, about her unspoken words, the conversation that she has been yearning to make. Be a part of her dilemma, her repressed passions, the unsaid words, an incomplete engagement, adhoori baat.

एक अधूरी बात

एक सहमी सी मुसकान

कुछ दबे शब्द,

कुछ बेरुख़ा सा वक़्त

वक़्त की बंदिश में बँधे कुछ बोल

घड़ी के काँटों में बँधे ये क़दम

यह एक नदी है जो थमी है

थमे पानी की कश्मकश में डूबते है हम

बंद दरवाज़ों की है यह भटकन।

एक अधूरी बात, एक सहमी सी मुसकान

एक ऐसा मन्थन, एक ऐसी उलझन

गुज़रते वक़्त के दर्पण से मिट रहे अब हम

तक़दीर के तराज़ू से जूझते है हम।

है पास अपने एक बंद मुसकान

कभी ना ख़त्म होती थकान।

एक नन्ही सी कली

जो घटाओं से लड़ी

लड़कर भी ना खिली,

बंद दरवाज़ों में पली।

यही है इस वक़्त का झरोखा

कोई आँसू अब ना बहता

कोई पंछी अब हवा से कुछ ना कहता

रह गई है बस एक अधूरी सी बात

एक अधूरी सी मुलाक़ात।

While she struggles with her emotion, he experiences a similar affliction. It’s difficult to choose love when you are in troubled circumstances. Here is his dilemma

कुछ बातें

कुछ बातें दिल की किताबों में बंद है

कुछ जज़्बात महसूस करने भी मुश्किल हैं

रात की सलाखों के दर्द सुबह की रोशनी में गुम हैं,

जिन क़दमों की ना दस्तक

उसका अस्तित्व नामुमकिन है।

शब्दों पे पंख हर ज़ुबान पर आते नहीं

कुछ बातें यूँ दिल की किताबों में बन्द है।

शाम की रोशनी सबके नसीब में नहीं

उतरती रात पे जब नज़र है।

What will happen to them? Her repressed soul, his troubled circumstances and this last meeting.

 

 

 

 

 

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